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Showing posts from June, 2026
महिलाओं का ईदगाह
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सबसे अलग ईद पर मुस्लिम समाज के पुरूष ही ईदगाह पर जाते ओर नमाज अदा करते हैं। किंतु उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद के चांदपुर कस्बे में एक ऐसा ईदगाह भी है, जहां सिर्फ मुस्लिम महिलाएं ही ईद पर नमाज अदा करती हैं। खास बात यह है कि इस ईदगाह के बारे में बिजनौर जनपद के ही बड़ी संख्या में रहने वालों को जानकारी नही हैं। चंादपुर से बास्टा जाने वाले मार्ग पर स्थित यह ईदगाह नया नहीं है। सौ साल से ज्यादा पुराना है। इसमें छोटी ईंट का बना कुंआ है, जो इसकी प्राचीनता बताने के लिए काफी है। ईदगाह में लगे पेड़ ही काफी प्राचीन है। ईदगाह के संचालक शाहबुुद्दीन बतातें है कि ईदगाह का नाम अहले हदीस है और यह सौ साल से भी ज्यादा पुराना है। वे बताते है कि ईदगाद ढ़ाई बीघा जमीन में स्थित हैं। ईद से क ई दिन पहले कमेटी ईदगाह की सफाई कराती है। ईद से एक दिन पूर्व ईदगाह के चारों ओर कनात लगवाई जाती हंै। इन कनातों के पीछे महिलांए नमाज अदा करती हैं। कनात इसलिए लगवाई जाती है कि महिलांए नवाज के समय पुरूषों के सामने न आए और पर्दा बना रहे। वे बताते हैं कि उनके ह...
विश्व के अजूबों से कम नहीं कालागढ़ डेम
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सबसे अलग विश्व के अजूबों से कम नहीं कालागढ़ डेम उत्तरांचल का रामगंगा नदी पर बना कालागढ़ का डेम विश्व के प्रसिद्ध अजूबों जैसा ही है। इसे एशिया का सबसे बड़ा मिट्टी का डेम होने का सौभाग्य प्राप्त है। डेम एरिया में मैसूर के काबेरी नदी पर बने वृंदावन गार्डन की तर्ज पर विकसित शानदार उद्यान भी है। कालागढ़ से कार्बेट में प्रवेश के लिए एक गेट भी है। इस गेट से प्रवेश कर कार्बेट के वन्य प्राणियों का भी आसानी से अवलोकन किया जा सकता है। यहां से कंडी मार्ग से एक और कोटद्वार तो दूसरी ओर रामनगर भी जाया जा सकता है। शिवालिक पहाडिय़ां पर्यटकों को सदैव अपनी और आकर्षित करती रही हैँ। दिल्ली से लगभग २५० किलो मीटर की दूरी पर रामगंगा के तट कालागढ़ स्थित है। दिल्ली से मेरठ बिजनौर होकर लगभग पांच घंटे में कालागढ़ पंहुचा जा सकता है। कालागढ़ में सिंचाई विभाग के कुछ रेस्ट हाउस और प्रशिक्षण केंद्र हैं। डेम बनने के समय कर्मचारियों और अधिकरियों के लिए कुछ कालोनी बनी थी। रिजर्व वन होने के कारण डेम बनने के बाद कालागढ़ की भूमि का...