श्री जंभेश्वर तपोवन आश्रम धाम पर 18 को विश्श्नोई समाज करेगा पूजा − अर्चन
श्री जंभेश्वर तपोवन आश्रम धाम पर 18 को विश्श्नोई समाज करेगा पूजा − अर्चन
बिजनौर मंडावर मार्ग पर मुहम्मदपुर देवमल में विश्नोईयों का मंदिर है। मंदिर गांव से लगभग छह−सात किलो मीटर दूर जंगल में हैं। यहां प्रत्येक साल होली के बाद चेत्र अमावस्या को मेला लगता है। इस बार चैत्र अमावस्या 18 मार्च की है। जिले से बड़ी तादाद में श्रद्धालू यहां आते। गुरू श्री जंभेश्वर महाराज जी द्वारा लगाए खेजड़ी वृक्ष पर श्रद्धालु कलावा बांधकर अपनी मन्नतें मांगते है । सवेरे हवन होता है। उसके बाद श्रद्धालुओं के लिए भंडारा होता है । श्रद्धालु भंडारे में प्रसाद ग्रहण करते हैं । कुछ यहां गुरू जी के कथनानुसार पौधे भी रोपतें हैं।
मान्यता है कि श्री जंभेश्वर महाराज राजस्थान के समराथल धोरा से चलकर नदी किनारे मोहम्मदपुर देवमल के जंगल में अपनी जमात के साथ सन 1533 ई. में आकर यहां रुके। तब यह वन क्षेत्र था। यह स्थान नदी किनारे होता था। गुरु महाराज ने अपने रूकने के दौरान यहां अपने हाथों से खेजड़ी का वृक्ष लगाया और छह माह तक यहां रूककर तप किया। आज इस स्थान पर गुरू जंभेश्वर महाराज द्वारा लगाए गये खेजड़ी के कई वृक्ष हैं।आश्रम के पास लगभग छह बिघे भूमि है। इसमें प्राचीन कुंआ और साधु− संतों के रहने के लिए भवन आदि भी है। एक मंदिर है। इसमें गुरू जंभेश्वर महाराज की तस्वीर भी लगी है।
बताया जाता है कि गुरू जंभेश्वर महाराज के यहां आने के समय यह वन क्षेत्र गंगा किनारे था। इसीलिए इस स्थान का नाम श्री जंभेश्वर तपोवन आश्रम धाम पड़ा।
चैत्र अमावस्या हिंदू कैलेंडर के नए वर्ष (विक्रमी संवत) से ठीक पहले आती है। यह समय पुरानी नकारात्मकता को छोड़कर आध्यात्मिक रूप से स्वयं को शुद्ध करने का माना जाता है। बिश्नोई समाज, जो प्रकृति और जीव रक्षा के लिए जाना जाता है, इस अमावस्या पर जम्भेश्वर जी की शिक्षाओं का स्मरण करते हुए पर्यावरण शुद्धि के लिए जांभाणी हवन और मेले आयोजित करता है। गुरु जम्भेश्वर के प्रति आस्था (मुकाम धाम): बीकानेर जिले के नोखा के पास मुकाम धाम में गुरु जम्भेश्वर जी का समाधि स्थल है। अमावस्या के दिन, विशेष रूप से चैत्र अमावस्या, श्रद्धालु अपने आराध्य को नमन करने, विशाल जागरण और मेलों के माध्यम से वहां एकत्रित होते हैं।होली (फाल्गुन पूर्णिमा) के बाद यह पहली प्रमुख अमावस्या होती है, जो आध्यात्मिक सभाओं के लिए उपयुक्त है।
93 वर्षीय देवेंद्र विश्नोई यह तो बताते हैं कि यहां प्रत्येक साल होली के बाद चेत्र अमावस्या को मेला लगता है। बीकानेर से आए पंडित हवन कराते हैं। उसके बाद भंडारा होता है। सुश्री पूनम विश्नोई और उनके भाई डाक्टर दीपक विश्नोई कहते हैं कि कुछ श्रद्धालु यहां आने वालों के लिए भंडारा करते हैं। कुछ श्रद्धालु इस अवसर पर पौधे रोपतें हैं।
गांव के जितेंद्र कुमार बिश्नोई (85 वर्ष ) बताते हैं कि उनके बुजुर्ग कन्हैया लाल सुनते थे कि यह गांव बिजनौर शहर से मंडावर रोड होते हुए लगभग 12किलोमीटर दूर यह आश्रम मोहम्मदपुर देवमल से एक किलोमीटर दूर रावली रोड पर जंगल में स्थित है। पुराने समय में यहां किसी मनुष्य का आना-जाना नहीं था, स्कन्ध पुराण के अध्याय 59 के अनुसार यह काण्व ऋषि आश्रम की सीमा में है। यहां चैत्र अमावस्या को प्रतिवर्ष भव्य एवं विशाल मेला लगता है। इसमें हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि प्रांत से श्रद्धालु आते हैं और खेजड़ी वृक्ष में कलवा बांधकर अपनी मन्नतें मांगते हैं। मन्नत पूरी होने पर आश्रम पर चादर चढ़ाते हैं एवं भंडारे भी करते हैं।
अरविंद कुमार (78 वर्ष ) का कहना है कि उनके बुजुर्ग नत्थू सिंह कहते थे यहां प्रतिवर्ष भंडारा व हवन यज्ञ किया जाता है। यहां स्वामी रामेश्वरानंद जी महाराज ने भी राजस्थान के समराथल से आकर माह तक यज्ञ किया था।
गांव के ही हरीश कुमार बिश्नोई 80 वर्ष के पिताजी सुनाते थे श्री जंभेश्वर तपोवन आश्रम का निर्माण लगभग 500 वर्ष पहले किया गया है। आश्रम पर किए गए कुएं का निर्माण भी 300 वर्ष पुराना है। इसमें आज भी पानी मौजूद है।
अशोक मधुप
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