बिजनौर के धर्मेंद्र त्यागी की देन है परिवार कल्याण का लाल तिकोन


बिजनौर जनपद का रतनगढ़ एक एतिहासिक गांव है। इस गांव ने देश को कई प्रतिभाएं दी । देश के परिवार कल्याण कार्यक्रम को लाल तिकोन देने वाले धर्मेंद्र त्यागी−देव त्यागी उर्फ डीके त्यागी इसी रतनगढ़ की संतान हैं।
रतनगढ़ की स्थापना उन्नीसवीं शताब्दी के आरंभ में राव जोखा सिंह त्यागी ने की थी। वे मराठा संघ सेना की उत्तरी शाखा के पूर्व सेनापति (या राव ) थे । इनका नियंत्रण हिमालय की तराई घाटियों तक फैला हुआ था। दिल्ली के युद्ध में मराठों के पतन के बाद, वे एक भाड़े के साहसी सैनिक बन गए। कुछ समय तक उन्होंने मेरठ के पास स्थित सरधना रियासत के सेनापति ( सिपहसलार ) के रूप में कार्य किया ।
इनके परिवार वाले बताते हैं कि सरधना की बेगम समरू के नाराज होने पर इन्होंने सरधना छोड़ दिया। पहले बुलंदशहर गए। बाद में राम जोखा सिंह रतनगढ़ आ गए। उन्होंने ही रतनगढ़ की स्थापना की।
नूरपुर के निवासी धर्मेंद्र त्यागी 1950 के आसपास भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में डाइरेक्टर बने। 1950 और 1960 के दशक में लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक करना सबसे मुश्किल काम था । उन्होंने अपने नारों, प्लानिंग और सिंबल से देशभर में परिवार नियोजन को लेकर एक खास जागरूकता पैदा की थी। उन्होंने फैमिली प्लानिंग का निशान लाल रंग का जो उल्टा त्रिभुज बनाया। ये लाल रंग का उल्टा त्रिभुज धीरे −धीरे पूरी दुनिया में इस कदर लोकप्रिय हुआ कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे फैमिली प्लानिंग का प्रतीक माना गया। उल्टा लाल त्रिभुज का सिंबल दिखते ही ये जाहिर हो जाता है कि बात परिवार नियोजन की हो रही है। विकीपीडिया के अनुसार इस उल्टे लाल त्रिभुज को भारत ने 1960 के दशक में अपनाया। अब ये उल्टा लाल त्रिभुज दुनिया भर में परिवार कल्याण का प्रतीक बन गया। धर्मेंद्र त्यागी ने 50 और 60 के दशक में जनसंख्या नियंत्रण के लिए जो नारे गढ़े, जो सिंबल बनाया, वो आज भी लोकप्रिय है।
धर्मेंद्र देव त्यागी, 1969 तक भारतीय परिवार नियोजन कार्यक्रम के सहायक आयुक्त (असिस्टेंट कमिश्नर ) थे। लाल रंग सतर्कता और ध्यान आकर्षित करने का प्रतीक है, और उल्टा त्रिकोण परिवार नियोजन स्वास्थ्य सेवाओं का प्रतीक बन गया। उन्होंने नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी की सरकारों के दौरान "दो या तीन बच्चे, बस" के नारे के साथ पत्थरों, होर्डिंगों और इमारतों पर लाल त्रिकोण को पेंट करवाया था।
लगभग 30 – 40 साल पहले ये लेखक रतनगढ़ गया था। धर्मेंद्र देव त्यागी के एक मंजिले मकान के छज्जे पर उल्टा लाल तिकोन बना था। पिछले साल जब रतनगढ़ गया तो ये लाल तिकोन ढह गया था। देखरेख के अभाव में धर्मेंद्र त्यागी का मकान भी खस्ता हाल में था। बताया गया कि उनका परिवार दिल्ली रहता है। यहां आने का किसी को समय नही।
अशोक


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