दो बार राज्य सभा सदस्य रहे शेरकोट के डॉ. जगदीश प्रसाद माथुर
दो बार राज्य सभा सदस्य रहे शेरकोट के डॉ. जगदीश प्रसाद माथुर
भाजपा को अपना पूरा जीवन समर्पित कर देने वाले डॉक्टर जगदीश प्रसाद माथुर का जन्म नौ नवंबर 1921 को जनपद बिजनौर के शेरकोट नगर में महावीर प्रसाद के घर में हुआ । उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की । 1942 में वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े । 1945 में आरएसएस के प्रचारक बन गए । 1952 में भारतीय जनसंघ के सदस्य बने और बरेली के संभागीय सचिव बनाए गए । उसके बाद वह केंद्रीय कार्यालय में सचिव रहे। राष्ट्र सचिव का पद उन्हें मिला । राष्ट्रीय कार्यकारिणी के आमंत्रित सदस्यों में भाजपा ने उन्हें शामिल किया। वे भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सचिव और उपाध्यक्ष रहे। पार्टी के आदेश पर राष्ट्रीय प्रवक्ता का पद उन्होंने ग्रहण किया । वे पूर्वोत्तर राज्य बिहार− जम्मू और कश्मीर तथा राजस्थान के पार्टी मामलों के प्रभारी बनाए गए । 1993 में भी राज्यसभा में भाजपा सदस्य दल के उपनेता बने । एक सांसद के रूप में उन्होंने अपनी अमिट छाप छोड़ी । वह अप्रैल 1978 और फिर अप्रैल 1990 में राज्यसभा के लिए चुने गए । 1990 में मुख्य सचेतक भी रहे।
एक सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में 1942 में उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया । 1953 में कश्मीर आंदोलन में भी इनकी भागीदारी रही। कश्मीर आंदोलन का नेतृत्व डॉक्टर श्यामा प्रकाश मुखर्जी ने किया था । देश में आपातकाल लागू होने पर जून 1975 से मार्च 1977 तक उन्होंने भूमिगत रहकर काम किया। उन्होंने विदेशी प्रचार का काम संभाला और गिरफ्तारी के लिए दिल्ली ने उनपर इनाम भी रखा।
जगदीश जी बहुत अध्ययनशील और तार्किक स्वभाव के व्यक्ति थे। परिवार में उर्दू के अध्ययन का माहौल होने के कारण वे उर्दू के अच्छे जानकार थे। जनसंघ में आने के बाद उन्होंने अपनी अंग्रेजी को भी परिमार्जित किया। क्योंकि उन्हें देश− विदेश के अनेक विषयों का अध्ययन करना पड़ता।
उन्होंने अपने संसदीय कार्य का निर्वाह करते हुए संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, मलेशिया, सिंगापुर जैसे देशों की यात्रा की। 2003 में वे श्री अटल बिहारी वाजपेई के साथ चीन गए। मेरठ विश्वविद्यालय ने उन्हें डाक्टरेट की मानद उपाधि दी । उन्होंने अपना पूरा अनुशासित जीवन जिया । उनका जीवन देश की सेवा व राष्ट्रवादी उद्देश्य से समर्पित रहा। उन्होंने पूरा जीवन राष्ट्र और पार्टी को समर्पित कर दिया । 20 अक्तूबर 2007 को 86 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ।
डॉ. जगदीश प्रसाद माथुर भारतीय राजनीति के उन विरल व्यक्तित्वों में से एक थे, जिन्होंने संगठन की शुचिता और वैचारिक स्पष्टता को सदैव सर्वोपरि रखा। माथुर जी का जीवन सादगी, समर्पण और राष्ट्रवाद की एक ऐसी गाथा है, जिसने भारतीय जनता पार्टी के वैचारिक आधार को मजबूत करने में महती भूमिका निभाई। उनका जन्म एक ऐसे कालखंड में हुआ जब देश स्वाधीनता के नव-विहान की ओर बढ़ रहा था, और उसी परिवेश ने उनके भीतर जनसेवा और राष्ट्रभक्ति के बीज बोए। कभी किसी ने सोचा भी नही था कि बिजनौर की शेरकोट की मिट्टी से निकला यह साधारण सा बालक आगे चलकर भारतीय राजनीति के फलक पर एक ऐसी चमक बिखेरेगा, जिसकी धमक राष्ट्रीय स्तर तक महसूस की जाएगी, इसकी कल्पना शायद उस वक्त किसी ने नहीं की थी।
−अशोक मधुप

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