द्वितीय विश्व युत्र के लिए बिजनौर ने खरीदा था हवाई जहाज
द्वितीय विश्व युत्र के लिए बिजनौर ने खरीदा था हवाई जहाज
हवाई जहाज का नाम भी बिजनौर रखा गया
बिजनौर वासी जानते भी नही कि कभी बिजनौर जिला प्रशासन ने युद्ध के लिए एक विमान खरीदा था। इस विमान का नाम भी बिजनौर ही था।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पूरे देश ने सरकार को रक्षा सामग्री,सैनिक और युद्धक सामग्री लेने के लिए जी खोलकर दान किया। बिजनौर ने भी इसमें बढ़ चढ़कर कर योगदान किया । युद्ध से जुड़े कार्यों के मदद के मामले में 'यूनाइटेड प्रॉविंस' (संयुक्त प्रांत) के 48 जनपदों में बिजनौर ने सातवां स्थान हासिल किया है।
1940 में, बिजनौर ने सार्वजनिक चंदे से 'यू. पी. स्क्वाड्रन' को एक 'स्पिरिटफायर' लड़ाकू विमान उपहार में दिया था। इसे ब्रिटिश युद्ध कैबिनेट के तत्कालीन सदस्य लॉर्ड बीवरब्रुक ने आभार के साथ स्वीकार किया । बिजनौर जिले के नाम पर इस विमान का नाम बिजनौर रखकर जिले को सम्मान दिया था। युद्ध के दौरान बिजनौर जनपद से कुल मिलाकर 3,503 लड़ाकू और गैर-लड़ाकू रंगरूटों (सैनिकों) की आपूर्ति की गई थी।
रक्षा बचत में 79,21,009 रुपये की राशि का योगदान दिया गया । महामहिम (एचई) के युद्ध उद्देश्य कोष में 11,85,105 रुपये दिए गए। इसके अलावा, बिजनौर ने 'बरेली हॉस्पिटैलिटी कमेटी फंड' को 1,67,165 रुपये की राशि दी। यह राशि रोहिलखंड डिवीजन के किसी भी जिले द्वारा दिया गया सबसे बड़ा योगदान था।
1945 के विक्ट्री अंक के अनुसार यह रिकॉर्ड पूरे जिले के अधिकारियों और गैर-अधिकारियों, छोटे और बड़े सभी लोगों के बीच घनिष्ठ सहयोग के कारण संभव हुआ। राज्यपाल ने बिजनौर में अपने एक भाषण में इसकी सराहना भी की थी। राज्यपाल ने युद्ध के दौरान तीन बार बिजनौर का दौरा किया। इनमें से प्रत्येक दौरा हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत था।
राज्यपाल को युद्ध कोष के लिए कुल मिलाकर 6,57,431 रुपये भेंट किये गए। कमिश्नर, रोहिलखंड डिवीजन को भी चार युद्ध कोष थैलियों में कुल मिलाकर 2,62,288 रुपये) भेंट किये। कमिश्नर ने हमारे काम में गहरी रुचि ली और अगस्त 1943 से अप्रैल 1945 के बीच हमारे यहाँ चार बार आए।
1940 के दशक में एक सुपरमरीन स्पिटफायर (Supermarine Spitfire) विमान की मूल उत्पादन लागत लगभग £8,900 से £9,500 पाउंड (उस समय के अनुसार) थी। इसे बाद में युद्ध के दौरान जनता से चंदा जुटाने के लिए प्रचारित मूल्य के रूप में लगभग £5,000 पाउंड भी कहा गया था।
स्पिटफ़ायर विमान की मुख्य विशेषताएं
यह रोल्स-रॉयस मर्कलिन वी-12 इंजन से लैस था। शुरुआती मॉडलों में लगभग 1,030 से 1,175 हॉर्सपावर की ताकत देता था। अधिकतम गति: यह विमान करीब 350 से 360 मील प्रति घंटे (लगभग 580 किमी/घंटा) की रफ्तार से उड़ान भर सकता था। बनावट और पंख: इसकी सबसे बड़ी पहचान इसके अनूठे अंडाकार पंख थे, जो इसे हवा में तेज गति से मुड़ने और बेहतरीन पैंतरेबाज़ी की क्षमता देते थे। 1940 के समय (जैसे मार्क I संस्करण) यह मुख्य रूप से आठ ब्राउनिंग मशीन गनों (.303 इंच) से लैस होता था। यह एक सिंगल-सीटर एक चालक वाला लड़ाकू विमान था। इसका उपयोग द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मुख्य रूप से ब्रिटेन की रक्षा के लिए इंटरसेप्टर के रूप में किया गया था।
हवाई जहाज का नाम भी बिजनौर रखा गया
बिजनौर वासी जानते भी नही कि कभी बिजनौर जिला प्रशासन ने युद्ध के लिए एक विमान खरीदा था। इस विमान का नाम भी बिजनौर ही था।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पूरे देश ने सरकार को रक्षा सामग्री,सैनिक और युद्धक सामग्री लेने के लिए जी खोलकर दान किया। बिजनौर ने भी इसमें बढ़ चढ़कर कर योगदान किया । युद्ध से जुड़े कार्यों के मदद के मामले में 'यूनाइटेड प्रॉविंस' (संयुक्त प्रांत) के 48 जनपदों में बिजनौर ने सातवां स्थान हासिल किया है।
1940 में, बिजनौर ने सार्वजनिक चंदे से 'यू. पी. स्क्वाड्रन' को एक 'स्पिरिटफायर' लड़ाकू विमान उपहार में दिया था। इसे ब्रिटिश युद्ध कैबिनेट के तत्कालीन सदस्य लॉर्ड बीवरब्रुक ने आभार के साथ स्वीकार किया । बिजनौर जिले के नाम पर इस विमान का नाम बिजनौर रखकर जिले को सम्मान दिया था। युद्ध के दौरान बिजनौर जनपद से कुल मिलाकर 3,503 लड़ाकू और गैर-लड़ाकू रंगरूटों (सैनिकों) की आपूर्ति की गई थी।
रक्षा बचत में 79,21,009 रुपये की राशि का योगदान दिया गया । महामहिम (एचई) के युद्ध उद्देश्य कोष में 11,85,105 रुपये दिए गए। इसके अलावा, बिजनौर ने 'बरेली हॉस्पिटैलिटी कमेटी फंड' को 1,67,165 रुपये की राशि दी। यह राशि रोहिलखंड डिवीजन के किसी भी जिले द्वारा दिया गया सबसे बड़ा योगदान था।
1945 के विक्ट्री अंक के अनुसार यह रिकॉर्ड पूरे जिले के अधिकारियों और गैर-अधिकारियों, छोटे और बड़े सभी लोगों के बीच घनिष्ठ सहयोग के कारण संभव हुआ। राज्यपाल ने बिजनौर में अपने एक भाषण में इसकी सराहना भी की थी। राज्यपाल ने युद्ध के दौरान तीन बार बिजनौर का दौरा किया। इनमें से प्रत्येक दौरा हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत था।
राज्यपाल को युद्ध कोष के लिए कुल मिलाकर 6,57,431 रुपये भेंट किये गए। कमिश्नर, रोहिलखंड डिवीजन को भी चार युद्ध कोष थैलियों में कुल मिलाकर 2,62,288 रुपये) भेंट किये। कमिश्नर ने हमारे काम में गहरी रुचि ली और अगस्त 1943 से अप्रैल 1945 के बीच हमारे यहाँ चार बार आए।
1940 के दशक में एक सुपरमरीन स्पिटफायर (Supermarine Spitfire) विमान की मूल उत्पादन लागत लगभग £8,900 से £9,500 पाउंड (उस समय के अनुसार) थी। इसे बाद में युद्ध के दौरान जनता से चंदा जुटाने के लिए प्रचारित मूल्य के रूप में लगभग £5,000 पाउंड भी कहा गया था।
स्पिटफ़ायर विमान की मुख्य विशेषताएं
यह रोल्स-रॉयस मर्कलिन वी-12 इंजन से लैस था। शुरुआती मॉडलों में लगभग 1,030 से 1,175 हॉर्सपावर की ताकत देता था। अधिकतम गति: यह विमान करीब 350 से 360 मील प्रति घंटे (लगभग 580 किमी/घंटा) की रफ्तार से उड़ान भर सकता था। बनावट और पंख: इसकी सबसे बड़ी पहचान इसके अनूठे अंडाकार पंख थे, जो इसे हवा में तेज गति से मुड़ने और बेहतरीन पैंतरेबाज़ी की क्षमता देते थे। 1940 के समय (जैसे मार्क I संस्करण) यह मुख्य रूप से आठ ब्राउनिंग मशीन गनों (.303 इंच) से लैस होता था। यह एक सिंगल-सीटर एक चालक वाला लड़ाकू विमान था। इसका उपयोग द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मुख्य रूप से ब्रिटेन की रक्षा के लिए इंटरसेप्टर के रूप में किया गया था।
अशोक मधुप आठ सिंतबर 2026 अमर उजाला

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