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बन्दूक का लाइसेंस न बनने पर गिरा दी थी सरकार

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 स्योहारा से तीन बार विधायक रहे शौनाथ सिंह बिश्नोई की बोलती थी तूती इतिहास लाइसेंस नहीं बनाने पर गिरा दी।  सरकार चौधरी चरण सिंह से नाराजगी पर 40 विधायक लेकर कांग्रेस में हुए थे शामिल कांग्रेस की सरकार में शौनाथ सिंह गन्ना विभाग के कैबिनेट मंत्री बने।  ✍️ अशोक मधुप बिजनौर।  जिले की सियासी इतिहास के पन्ने जब भी पलटे जाएंगे, पूर्व विधायक शौनाथ सिंह बिश्नोई का नाम जरूर याद आएगा। स्योहारा सीट से तीन बार विधायक रहे शौनाथ सिंह ने सरकार महज इसलिए गिरा दी थी, क्योंकि उस समय के जिलाधिकारी ने उनके कहने से एक शस्त्र लाइसेंस नहीं बनाया था और तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी चरण सिंह ने उनके कहने के बावजूद डीएम का तबादला नहीं किया था। शौनाथ सिंह मूलत: स्योहारा क्षेत्र के गांव बुढ़ानपुर (सलेमपुर) के रहने वाले थे। बाद में हस्ताक्षर करना जरूर सीख गए थे। अपनी बात मनवाने के लिए अफसरों से भिड़ जाते थे। यही उनकी जीत का कारण भी बनता था। बात तब की है, जब चौधरी चरण सिंह ने कांग्रेस से अलग होकर भारतीय क्र ांति दल (बीकेडी) बनाई। शौनाथ सिंह नूरपुर (बाद में स्योहारा सीट बनी) से पहली बार 1967 में बीके...

धराेहरों का विकास हो

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मोटा महादेव

  मोटा महादेव   नजीबाबाद   हरिद्वार मार्ग पर साहनपुर कस्बे के बाहर सड़क किनारे स्थित   मोटा महादेव शिवालय एक प्रसिद्ध एवं   सिद्ध स्थल है।इस मार्ग से हरिद्वार से कावंड   लेकर आने वाले कांवडियां यहां जल चलाकर आने अपने गंतव्य   की ओर बढ़ते हैं। मान्यता है   कि यहां जल चढाए बिना कांवड यात्रा   पूर्ण   नही होती। मान्यता है कि खेत की सफाई   के दौरान मंदिर में लगा शिव लिंग मिला1   मंदिर के पुजारी शशिनाथ के अनुसार   दिर के स्थान पर पहले जंगल था। लगभग   दो सौ साल से भी पहले क्षेत्र की   सफाई   कराते यहां   जमीन से   ये विशाल   शिवलिंग निकला।शिवलिंग मिलने की सूचना चारों और फैल गई।श्रद्धालु आने   लगे।साहनपुर स्टेट के राजाओं ने मंदिर बनवाया। राजा    चतर सिंह ने   मंदिर को वर्तमान रूप   दिया।   मंदिर प्रांगण में भैरों बाबा का भी मंदिर है। शिवलिंग    बहुत मोटा   और पुरूष के लिंग के अग्रभाग की तरह बना है।लिंग इतना   मोटा है कि आम आदमी की कौली में नह...

कण्व आश्रम

  कण्व  आश्रम     प्राचीन भारत   में ' कण्व ' नाम के अनेक व्यक्ति हुए हैं। इनमें सबसे अधिक प्रसिद्ध वह  महर्षि कण्व थे , जिन्होंने   अप्सरा   मेनका   के गर्भ से उत्पन्न ऋषि   विश्वामित्र   की कन्या   शकुंतला   को पाला और बड़ा किया । देवी   शकुन्तला   के धर्मपिता के रूप में महर्षि कण्व की अत्यन्त प्रसिद्धि है।ये उस समय में कुलाधिपति थे । विश्व का पहला गुरूकुल इनका ही था। पुराणों के अनुसार कण्व आश्रम में दस हजार ऋषि शिक्षा ग्रहण करते थे। वीकीपीडिया के अनुसार  कण्व   या   कण्व  (  संस्कृत  : कण्व   कण्व  ), जिसे   कर्णेश भी कहा जाता है ,  त्रेता युग   के   एक प्राचीन   हिंदू   ऋषि थे         ऋग्वेद के कुछ सूक्त इनके   बताए गए हैं।   वह   अंगिरसों   में से एक थे ।   उन्हें घोरा का पुत्र कहा गया है , लेकिन यह वंश प्रगथ कण्व का है , जो बाद के कण्व थे , जिनमें से कई थे।    हालाँकि ,...

नगीने का लकड़ी पर नक्काशी का कारोबार

    अशोक मधुप   नगीना आज लकड़ी पर नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है, किंतु   कभी   नगीना की प्रतिष्ठा इसकी लकड़ी की नक्काशी के बजाय इसके धातु उद्योगों पर थी ।   इसे अक्सर बंदूक बनाने की कला के साथ जोड़ा जाता था। माचिस की तीलियों को   नक्काशीदार लकड़ी के चार डिब्बों में रखकर   1867 की पेरिस प्रदर्शनी में भेजा गया था । प्रत्येक डब्बे   को 375 फ़्रैंक की कीमत पर बेचा गया था । यह स्थान लंबे समय से धामपुर और नजीबाबाद की तरह   हथियारों के बनाने के लिए प्रसिद्ध था ।*   आज   बिजनौर जिले की सबसे महत्वपूर्ण पुराने समय की औद्योगिक कला नगीने की लकड़ी पर        नक्काशी है । ऐसा कहा जाता है कि यह शिल्प मुल्तानी व्यापारियों द्वारा    नगीना   लाया गया। नगीना के कारीगर पीढ़ियों से आबनूस की गनस्टीक ,खाट ,पाये   और मसनद बनाते रहे हैं । ये   आमतौर पर उन्हें सतही पुष्प पैटर्न से सजाते हैं। बाद में इन कारीगरों ने   कैबिनेट बनाने में उच्च दक्षता हासिल कर ली । यह उद्योग ज्यादातर मुसलमान कलाकार और...